Kavad Yatra Kaise Kare ki Jankari Hindi Me

Kavad Yatra Kaise ki Jaati hai, और इस यात्रा से क्या फल मिलता है, इसकी पूरी जानकारी आपको मेरी आज की इस पोस्ट के माध्यम से मिलने वाली है. आज मैं आप सभी को भगवान भोलेनाथ की उस यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी देने वाला हु. जिस यात्रा को करोडो लोग हर साल पैदल चलकर पूरा करते है. तो चलिए शिव भगवान की यात्रा की पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए शुरू करते है अपना आज का यह Article जिसका नाम है. Kavad Yatra Kaise Kare ki Jankari Hindi Me.

Kavad Yatra Kaise Kare ki Jankari Hindi Me
Kavad Yatra Kaise Kare ki Jankari Hindi Me

भगवान् शिव की आराधना के लिए फागुन महिना और सावन का महिना सबसे खास माना जाता है. इन महीने में होने वाली शिवरात्रि का इन्तजार सभी शिव भक्तो को होता है. भगवान भोलेनाथ के भक्तो का सबसे खास महिना सावन का होता है. दोनों ही अवसर पर शिवजी के भक्त हरिद्वार से ऋषिकेश और गोमुख तक पैदल यात्रा करते हुवे वहा से गंगाजल भरकर शिवरात्रि के दिन अपने प्यारे शिव भगवान का जलभिसेक करते है. भगवान शिव की इसी यात्रा को Kavad Yatra बोला जाता है. सावन के महीने में बरसात भी होती है. इसलिए करोडो शिवभक्त इसी सावन के महीने में कवाड यात्रा करते है.

Kavad Yatra Kaise Kare ki Jankari Hindi Me

चलिए अब बात करते है कि आखिर Kavad Yatra की शुरुआत कैसे हुई. कवाड यात्रा से जुडी बहुत सी कथाए हम लोगो के बिच मोजूद है. उन्ही में से एक कथा इस प्रकार है. कहा जाता है कि सबसे पहले भगवान पशुराम ने कावड़ के जरिये गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलभिषेक किया था.

कुछ लोगो की यह भी मान्यता है कि कावंड की परम्परा श्रवण ने शुरू की थी. जिसने अपने अंधे माता पिता को दोनों कंधो पर कावंड के रूप में उठाकर उन्हें गंगा स्नान कराया था. माता पिता को गंगा स्नान कराने के लिए श्रवण अपने माता पिता को कावंड में बिठाकर हरिद्वार लाये थे.

वही कुछ लोग समुन्द्र मंथन की बाते भी करते है. कुछ लोगो की मान्यता के अनुसार समुन्द्र के द्वारा निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण तो कर लिया था. जिसकी वजह से उनका नाम नीलकंठ भी पड़ा, लेकिन विष पिने के बाद उनके उपर कुछ नकारत्मक प्रभाव भी पड़ने लगे.

नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए उन्होंने चंदमा को अपने मस्तक पर धारण कर लिया. इसके बाद देवताओ ने शिव जी का गंगाजल से जलभिषेक किया. इसी से जुडी एक और मान्यता है. कि जब नीलकंठ महादेव पर विष के नकरात्मक प्रभाव होने लगे तब शिव भक्त रावन ने पूजा पाठ करते हुवे कवाडं के जरिये गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलभिषेक किया. जिसके कारण भगवान शिव नकरात्मक प्रभाव से दूर हुवे. इन्ही कथाओ के कारण ही Kavad Yatra की शुरुआत हुई.

Kavad Yatra करने का महत्पूर्ण तत्व गंगाजल होता है. क्युकी गंगाजल से ही भाग्वाव शिव जी का जलभिषेक किया जाता है. शिव भक्त गंगाजल को अलग अलग तरीके से लेकर आते है. जिसमे से दो तरीके प्रमुख है एक है व्यक्तिगत रूप से कावंड लाना और दूसरा है सामूहिक रूप से कावंड लाना. जिसे लोग पैदल कावंड और डाक कावंड बोलते है.

पैदल कांवड़ यात्रा की जानकारी

सबसे ज्यादा पैदल कावंड यात्रा ही की जाती है. पैदल कावंड व्यक्तिगत रूप से ही लायी जाती है. लेकिन कई बार अपने प्रियजन की असमर्था के कारण उनके नाम से कुछ लोग कावंड लेकर आते है. पैदल यात्रा में यात्री को यह ध्यान रखना होता है कि जिस स्थान से उसे कावंड लेकर आनी है.

और जहाँ उसे भगवान का जलभिषेक करना है, उसकी दुरी कितनी है. दुरी के अनुसार ही उसे अपनी कावंड यात्रा की योजना बनानी होती है. उसे हर हाल में शिवरात्रि तक अपने उस स्थान पर पहुचना होगा, जहा उसे भगवान शिव जी का जलभिषेक करना है. पैदल कावंड यात्री कुछ समय के लिए रास्ते में विश्राम भी कर सकते है.

डाक कावंड यात्रा की जानकारी

डाक कांवड़ में बहुत सारे लोगो का समहू होता है. यह बहुत तेजी से लाने वाली कांवड़ है. जो दोड़ते हुवे एक दुसरे को कावंड देते हुए उस स्थान तक जाते है जहा से उन्हें गंगाजल भरना होता है. जल भरने के बाद ठीक उसी तरह भागते हुवे ये लोग उस स्थान तक जाते है जहा उन्हें शिव जी का जलभिषेक करना होता है. इसमें कांवड़ यात्री को रुकना नहीं होता बल्कि लगातार चलते रहना होता है. मान्यता यह है कि जो भक्ति जितनी कठनाई और सच्चे मन से भगवान शिव की कावंड यात्रा पूरी करके उनका जलभिषेक करता है. उस पर भगवान शिव की क्रप्या उतनी ही अधिक होती है.

Kavad Yatra ke नियम की जानकारी 

अब थोडा हम कावंड यात्रा के नियम के बारे में जान लेते है. क्युकी अगर यह यात्रा आपने नियम के साथ नहीं करी तो इस यात्रा का आपको कोई फल नहीं मिलेगा.

  1. कावंड यात्रा शुरू करने वाले व्यक्ति को किसी भी प्रकार का नशा करना वर्जित होता है. यात्रा के दोरान और यात्रा पूरी होने तक उस व्यक्ति को मांस, शराब और किसी भी नशा करने वाली चीज से दूर रहना होता है. 
  2. यात्रा के दोरान बिना स्नान किये आप कावंड को हाँथ नहीं लगा सकते, इसलिए नाहने के बाद ही आप कावंड को हाँथ लगाये.
  3. चमड़े की किसी वस्तु का स्पर्श, चारपाई का उपयोग, वाहन का इस्तेमाल और किसी पेड़ या पोधे के निचे कावंड को रखना वर्जित है.
  4. कावंड यात्रा के दोरान पुरे रास्ते बम बम बोले और बोल बम जैसे शिव का उच्चारण करना फलदायी होता है. कावंड को अपने सर के उपर से लेकर जाना भी वर्जित मन जाता है.

कवंद यात्रा के इन सभी नियम का पालन हर कावंड यात्री को करना चाहिए. तब ही जाकर आपकी कावंड यात्रा सफल होगी. तो मुझे उम्मीद है मेरे आज के इस Kavad Yatra Kaise Kare ki Jankari Hindi Me आप सभी को जरुर पसंद आई होगी. आगे भी आप लोगो के लिए ऐसी ही जानकारी लाता रहूँगा. आप मेरे साथ इसी तरह जुड़े रहे और इन्तजार करिए मेरी आने वाली पोस्टो का.

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